अगर आप या आपके परिवार में कोई विदेश जाकर MBBS करने का सपना देख रहा है, या पहले से किसी विदेशी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने मार्च 2026 में एक ऐसा फैसला लिया है जिसने हजारों भारतीय छात्रों की नींद उड़ा दी है। यह नया नियम सिर्फ नए छात्रों पर नहीं, बल्कि उन छात्रों पर भी लागू होता है जो COVID-19 के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई कर चुके हैं।

NMC का बड़ा फैसला: क्या है नया नियम?
NMC के अंडर-ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (UGMEB) ने 5-6 मार्च 2026 को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया। इस नोटिस में साफ-साफ कहा गया है कि जिन भारतीय छात्रों ने विदेश में अपने MBBS कोर्स का कोई भी हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पूरा किया है, उन्हें अब उतने ही समय की फिजिकल ऑनसाइट ट्रेनिंग अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी। इसका सीधा मतलब यह है कि जो छात्र COVID-19 के दौरान भारत में बैठकर ऑनलाइन क्लास करते रहे, उन्हें अब विदेश जाकर उतने ही महीने की फिजिकल क्लिनिकल ट्रेनिंग करनी पड़ेगी।
NMC ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह ट्रेनिंग सिर्फ एक सर्टिफिकेट देकर पूरी नहीं होगी। अगर किसी छात्र के 6 महीने ऑनलाइन पढ़ाई में गए हैं, तो उसे 6 महीने की वास्तविक ऑनसाइट ट्रेनिंग करनी ही होगी और कोर्स की समय-सीमा भी उतनी ही बढ़ाई जाएगी।
यह आदेश क्यों आया? पुरानी एडवाइजरी का क्या हुआ?
NMC ने यह नया नोटिस 6 मार्च 2026 के पुराने नोटिस को निरस्त करते हुए जारी किया। दरअसल, इस विषय पर 2023 और 2024 में भी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जिसमें दिसंबर 2023 और जून 2024 की एडवाइजरी शामिल थीं। लेकिन छात्रों, विश्वविद्यालयों और राज्य मेडिकल काउंसिल की ओर से लगातार शंकाएं आती रहीं कि इन नियमों को व्यवहार में कैसे लागू किया जाए। इन्हीं सवालों के जवाब देने और नियमों को और स्पष्ट करने के लिए मार्च 2026 का नोटिस जारी हुआ।
NMC का तर्क बिल्कुल साफ है कि ऑनलाइन क्लासेज में डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए जरूरी हाथों-हाथ क्लिनिकल अनुभव नहीं मिलता, और बिना इस अनुभव के एक छात्र को डॉक्टर की डिग्री देना मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा।
किन छात्रों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
COVID-19 बैच के छात्र
यह नियम सबसे ज्यादा उन छात्रों पर लागू होता है जिन्होंने 2020 से 2022 के बीच विदेश में MBBS में दाखिला लिया था और COVID-19 के कारण 1 से 4 सेमेस्टर ऑनलाइन पढ़ाई की थी। इन छात्रों ने फीस भरी, क्रेडिट भी मिले, लेकिन वे शारीरिक रूप से अस्पताल में नहीं थे।
रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित छात्र
इसके अलावा जो छात्र रूस-यूक्रेन युद्ध (2022) के कारण अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़कर भारत लौट आए और उन्होंने बाद में ऑनलाइन क्लासेज जॉइन कीं, वे भी इस नियम के दायरे में आते हैं। इस फैसले का असर रूस, यूक्रेन, चीन, कजाकिस्तान, जॉर्जिया, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में पढ़ रहे हजारों भारतीय छात्रों पर पड़ेगा।
क्या है NMC का पूरा नियम? जानें विस्तार से
NMC के FMGL (Foreign Medical Graduate Licentiate) रेगुलेशन 2021 के तहत विदेश से MBBS करने वाले छात्रों के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं।
- 54 महीने की पढ़ाई अनिवार्य: विदेश में MBBS प्रोग्राम कम से कम 54 महीने यानी साढ़े चार साल का होना चाहिए। इससे कम समय का कोई भी प्रोग्राम भारत में मान्य नहीं होगा।
- 12 महीने की इंटर्नशिप: डिग्री के बाद भारत में 12 महीने की कंपल्सरी रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप (CRMI) पूरी करनी होगी।
- FMGE परीक्षा पास करना: भारत में प्रैक्टिस करने के लिए Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) पास करना जरूरी है।
- फिजिकल ट्रेनिंग सर्टिफिकेट: विदेशी विश्वविद्यालय को एक वैध ऑनसाइट ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जारी करना होगा जिसकी वेरिफिकेशन राज्य मेडिकल काउंसिल करेगी।
छात्रों का विरोध और NMC का यू-टर्न
जैसे ही यह नोटिस सामने आया, देशभर में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMGs) में गुस्से की लहर दौड़ गई। 16 मार्च 2026 को छात्रों ने नई दिल्ली स्थित NMC दफ्तर के बाहर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। छात्रों का तर्क था कि COVID-19 महामारी या युद्ध जैसी परिस्थितियां उनके नियंत्रण में नहीं थीं और ऐसे में 6 साल बाद उन्हें दोष देना अनुचित है।
All India Medical Students’ Association (AIMSA) और All FMGs Association (AFA) के नेतृत्व में छात्रों ने NMC को ज्ञापन सौंपा। इस दबाव के बाद NMC ने 17-18 मार्च 2026 को कुछ राहत का संकेत दिया और बताया कि छात्रों द्वारा पहले जमा किए गए कंपेंसेशन लेटर मान्य रहेंगे और एक संशोधित नोटिफिकेशन जल्द जारी किया जाएगा।
यह खबर WhatsApp पर वायरल क्यों हुई और सच क्या है?
सोशल मीडिया और YouTube पर कई भ्रामक वीडियो वायरल हुए जिनमें दावा किया गया कि “MBBS अब 8 साल का हो गया” या “NMC ने सभी विदेशी डिग्री रद्द कर दी।” ये दोनों ही बातें पूरी तरह गलत हैं। NMC ने किसी की डिग्री रद्द नहीं की है। जो छात्र पूरे समय ऑफलाइन पढ़ाई कर चुके हैं, उन पर इस नोटिस का कोई असर नहीं है। यह नियम केवल उन छात्रों पर लागू होता है जिनकी कुछ क्लासेज ऑनलाइन हुई थीं और जिन्होंने अभी तक उसकी भरपाई नहीं की है।
आगे क्या करें? छात्रों के लिए जरूरी सुझाव
अगर आप या आपका बच्चा इस स्थिति में है, तो घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन जल्द से जल्द कुछ कदम उठाना जरूरी है।
- अपने विश्वविद्यालय से संपर्क करें और जानें कि कितने सेमेस्टर ऑनलाइन हुए थे।
- सभी जरूरी दस्तावेज जैसे फीस रसीद, अटेंडेंस रिकॉर्ड और मार्कशीट सुरक्षित रखें।
- NMC की आधिकारिक वेबसाइट पर अपने विश्वविद्यालय का नाम मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची में जांचें।
- किसी अनुभवी मेडिकल एजुकेशन काउंसलर से सलाह लें।