राजस्थान में सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है, लेकिन यह अपडेट जितना अवसर लेकर आया है, उतनी ही चिंता भी पैदा कर रहा है। हाल ही में राजस्थान मेडिकल एज्यूकेशन सोसाइटी (राजमेस) से जुड़े मेडिकल कॉलेजों में पदों को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके बाद अब संविदा भर्ती का रास्ता खुल गया है। इस फैसले का असर न केवल वर्तमान कर्मचारियों पर पड़ेगा बल्कि आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी देखने को मिल सकता है।

राजमेस भर्ती 2026 में क्या है नया बदलाव
राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए राजमेस से जुड़े मेडिकल कॉलेजों में 1267 नियमित पदों को समाप्त कर दिया है। इन पदों को अब राजस्थान कॉन्ट्रेक्चुअल हायरिंग सिविल पोस्ट रूल्स 2022 के तहत संविदा पदों में बदल दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब इन पदों पर स्थायी भर्ती की बजाय कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर नियुक्ति की जाएगी।
इस बदलाव का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो अभी इन पदों पर कार्यरत हैं। उन्हें अन्य स्थानों पर समायोजित या स्थानांतरित किया जा सकता है। वहीं, नई भर्ती की बात करें तो अब उम्मीदवारों को बिना लिखित परीक्षा के चयन का मौका मिल सकता है, जो युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है।
हालांकि, कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है और नियमित भर्ती को फिर से बहाल करने की मांग की है।
किन पदों पर होगी संविदा भर्ती (Post Details)
राजमेस भर्ती 2026 के तहत कई महत्वपूर्ण मेडिकल और तकनीकी पदों को संविदा में बदला गया है। नीचे दी गई टेबल में इन पदों का विवरण दिया गया है:
| पद का नाम | पदों की संख्या |
| नर्सिंग ऑफिसर (नर्स- II) | 746 |
| नर्सिंग ट्यूटर | 240 |
| लैब टेक्नीशियन | 222 |
| बायोमेडिकल इंजीनियर | 13 |
| मेडिकल सोशल वर्कर | 7 |
| स्पीच थैरेपिस्ट | – |
| फिजियोथैरेपिस्ट | – |
| ऑडियोमेट्रिशियन | – |
इन पदों पर भर्ती के लिए आमतौर पर इंटरव्यू या मेरिट के आधार पर चयन किया जा सकता है, जिससे प्रक्रिया तेज और सरल हो जाती है। यही कारण है कि इसे “No Exam Bharti 2026” के रूप में देखा जा रहा है।
20 मेडिकल कॉलेजों पर पड़ेगा असर
इस फैसले का असर पूरे प्रदेश के लगभग 20 मेडिकल कॉलेजों पर पड़ेगा। इनमें सीकर, चूरू, भीलवाड़ा, भरतपुर, पाली, डूंगरपुर, बाड़मेर, सिरोही, धौलपुर, चित्तौड़गढ़, दौसा, अलवर, करौली, सवाई माधोपुर, हनुमानगढ़, बूंदी, नागौर, बांसवाड़ा, झुंझुनूं और बारां जैसे जिले शामिल हैं।
इन कॉलेजों में पहले से कार्यरत अनुभवी स्टाफ के हटने या स्थानांतरण से कार्य प्रणाली प्रभावित हो सकती है। संविदा कर्मियों के बार-बार बदलने से सेवाओं की निरंतरता में बाधा आ सकती है। इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ सकता है, खासकर गंभीर मामलों में देरी या लापरवाही की आशंका बढ़ सकती है।
साथ ही मेडिकल कॉलेजों में ट्रेनिंग और शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि स्थायी स्टाफ के मुकाबले संविदा कर्मचारी लंबे समय तक एक ही स्थान पर नहीं टिकते हैं।
युवाओं के लिए मौका या जोखिम? पूरी सच्चाई
एक तरफ देखा जाए तो यह भर्ती युवाओं के लिए सुनहरा मौका बन सकती है, क्योंकि बिना परीक्षा के सरकारी मेडिकल सेक्टर में नौकरी पाने का अवसर कम ही मिलता है। खासकर नर्सिंग, लैब टेक्नीशियन और पैरामेडिकल फील्ड से जुड़े उम्मीदवारों के लिए यह एक आसान एंट्री गेट बन सकता है।
लेकिन दूसरी तरफ, संविदा नौकरी में स्थिरता की कमी होती है। इसमें नौकरी की सुरक्षा कम होती है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। यही कारण है कि कर्मचारी संगठन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और इसे दीर्घकालिक रूप से नुकसानदायक बता रहे हैं।
कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राजेश बाटड़ के अनुसार, इस तरह स्थायी पदों को खत्म करना तानाशाही फैसला है और इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
अंत में, अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और जल्दी जॉब पाना चाहते हैं, तो यह भर्ती आपके लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है। लेकिन आवेदन करने से पहले संविदा नौकरी के सभी पहलुओं को अच्छे से समझना जरूरी है, ताकि आप अपने करियर के लिए सही निर्णय ले सकें।
यह भी पढ़े – 👉 Rajasthan 10th Board Result Update: अगले सप्ताह को इस दिन जारी होगा परिणाम! रोल नंबर से रिजल्ट ऐसे चेक करें